Wednesday, November 30, 2022
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Ramsar Sites, भारत को मिली पाँच नए रामसर साईट?

Ramsar Sites हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेडकर ने यह जानकारी साझा किया की पाँच और भारतीय आर्द्रभूमियों को रामसर साईट का दर्जामिल गया है ! इन्हें अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि’ के रूप में मान्यता मिली है !

रामसर साइट “Ramsar Sites” क्या है?

वर्ष 1971 में ईरान के शहर रामसर में अद्र्भूमियो के संरक्षण के लिए एक अन्तरराष्ट्रीय कन्वेंशन आयोजित किया गया जिसका नाम इस शहर के नाम पे रखा गया रामसर कन्वेंशन जिसके बाद यह अस्तित्व में आया !जिसमे एक संधि हुई , इस संधि को रामसर संधि कहा गया जिसे 1975 में लागु किया गया ! यह एक अंतर सरकारी संधि थी ! इसमें आर्द्रभूमि और उनके संसाधनों के संरक्षण और बुद्धिमानी भरे उपयोग के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की रूपरेखा प्रदान किया गया !

उद्देश्य?

इसका उद्द्देश्य था वैश्विक जैविक विविधता को संरक्षित करना औरसुरक्षित रखना !

ये पांच आर्द्रभूमियाँ है :-

तमिलनाडु- करीली पक्षी अभयारण्य, पल्लीकरनई मार्श रिजर्व फरिस्ट और पिचवरम मैंग्रोव , मध्य प्रदेश- साख्य सागर , मिजोरम- पाला आर्द्रभूमि

रामसर साइट “Ramsar Sites” का दर्जा क्यों?

रामसर मानदंड के तहत, आर्द्रभूमि को उनकी इकोलॉजी, बॉटनी, जूलॉजी, हाइड्रोलॉजी की जैव विविधता और विशिष्टता के संदर्भ में उनके अंतर्राष्ट्रीय महत्व के कारण रामसर सूची के लिए चुना जाना चाहिए! इसके अलावा, किसी भी मौसम में जलीय जीव जंतुओं या वाटर बर्ड्स के लिए अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि को रामसर सूची में शामिल करना ! रामसर साइट “Ramsar Sites” का टैग आर्द्रभूमि पर अतिक्रमण आदि के खिलाफ सुरक्षा मुहया कराता है !

आर्द्रभूमियाँ क्या हैं?

आर्द्रभूमि क्षेत्र (Wetland) एक ऐसा क्षेत्र होता है जहाँ जमीन पानी से ढकी होती है, जैसे- तालाब, झील, नदी का डेल्टा, दलदली भूमि और समुद्र का किनारा आदि जगहों को हम आद्र भूमि कह सकते है !

प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी: विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetlands Day) मनाया जाता है !

रामसर साईट “Ramsar Sites” किसे घोषित किया जा सकता है ?

दलदल, पंकभूमि, पीट भूमि वा पानी के क्षेत्र, चाहे प्राकृतिक या कृत्रिम, स्थायी वा अस्थायी, पानी के साथ चाहे स्थैतिक हो वा बहता हो, ताजा, खारा या नमकीन हो!इसमें समुद्री पानी के क्षेत्र भी शामिल हैं! जिसमें कम ज्वार हो पर गहराई 6 सीटर से अधिक नहीं हो !

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भारत में स्थिति ?

रामसर समझौता 21 दिसंबर 1975 से प्रभाव मेंआया ! भारत रामसर संधि पर 1 फरवरी 1982 को हस्ताक्षर किया ! वर्तमान में भारत में रामसर स्थलों की संख्या 54 है !जो दक्षिण एशिया के किसी भी देश के लिए सबसे अधिक , जबकि सबसे अधिक रामसर साइट वाले देश यूनाइटेड किंगडम (175) और मैक्सिको (142) है !हालांकि, भारत सरकार की आर्द्रभूमि की परिभाषा में नदियों के चैनल, धान के खेत आदि शामिल नहीं है जहाँ वाणिज्यिक गतिविधि होता है !

“Ramsar Sites”

विश्व आर्द्रभूमि दिवस पहली बार 1997 में मनाया गया तब से प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को आद्र्भूमि दिवस मनाया जाता है ! विश्व स्तर पर, आर्द्रभूमि दुनिया के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 6.4 प्रतिशत है ! भारत में, इसरो द्वारा संकलित राष्ट्रीय आर्द्रभूमि सूची और आकलन के अनुसार, भारत में आर्द्रभूमि 1,52,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है !जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल  का 4.63% है ! तटीय प्राकृतिक आर्द्रभूमि कुल आद्र्भूमि का 24.3%और अंतर्देशीय प्राकृतिक आद्र्भूमि लगभग 44% है !

भारत में आर्द्रभूमि?

भारत में 19 प्रकार की आर्द्रभूमि है !

भारत में राज्य-वार वितरण:-

गुजरात 34,700 वर्ग किमी राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 17.56% के साथ शीर्ष पर है ! आंध्र प्रदेश 14,500 वर्ग किमी क्षेत्रफल  के साथ भारत में दुसरे स्थान पर है ! तथा तीसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है जहाँ 12,500 वर्ग किमी क्षेत्रफल है ! देश के कुल आर्द्रभूमि क्षेत्रों का 22.7% लंबी तटरेखा के कारण है ! स्थलों में से:- UP में 10, पंजाब में 6, गुजरात, तमिलनाडुऔर जम्मूऔर कश्मीर में 4-4हिमाचल प्रदेश और कर्नाटकमें 3-3,हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान में 2-2 आद्र्भुमियाँ है ! आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, लद्दाख, मणिपुर, त्रिपुरा, उत्तराखंड में 1-1आद्र्भूमि है !

आर्द्रभूमियों से जुड़े प्रावधान?

रामसर कन्वेंशन: यह कन्वेंशन 1975 में लागू हुआ ! जिसकाउद्देश्यः सतत् विकास लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य विश्व में सभी आर्द्रभूमियों का संरक्षण और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग करने को बढ़ावा देना !

मोंट्रेक्स रिकॉर्ड: इसे रामसर सूची के हिस्से के रूप में ही शामिल किया जाता है यहआर्द्रभूमि स्थलों का एक रजिस्टर है जोपारिस्थितिक तंत्र में परिवर्तन हुए हैं या हो रहे हैं,तकनीकी विकास, प्रदूषण या अन्य मानवीय हस्तक्षेप का विवरण रखता है जिससे आद्र्भुमियो को ख़तरा है !

भारत में आद्र्भुमियो से  जुड़े प्रावधान ?

भारत में वेटलैंड्स का नियमन: आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत किया जाता है ! जो वर्ष 2010 के अधिनियम का संशोधित रूप है ! वर्ष 2010 केअधिनियम में केंद्रीय आर्द्रभूमि नियामक प्राधिकरण के गठन करने का प्रावधान था, लेकिन वर्ष 2017 में नए नियमों के अंतर्गत इसके स्थान पर राज्य-स्तरीय निकायों की व्यवस्था किया गया ! राष्ट्रीय आर्द्रभूमि समिति जो सलाहकार की भूमिका में है !

आद्र्भूमि का महत्त्व ?

आद्र्भूमि अत्यधिक उत्पादक पारिस्थितिक तंत्र हैवर्तमान समय में जो पूरी दुनिया के मत्स्य उत्पादन का दो-तिहाईहिस्सा है ! ये उच्च स्तर के पोषक तत्वों और जीवों के विकास के लिये आदर्शपरिस्थितिक प्रदान करता है ! यहाँ जीव खाद्य बेब का आधार होता है जहाँ मछली, उभयचर, शंख व कीड़ों की कई प्रजातियों यहाँ पाई जाती है जिसका भोजन यहाँ पर उपलब्ध होता है !

बाढ़ के पानी की गति को धीमा करने में, मिट्टी के कटाव को कम करने में,विभिन्न प्रकार के प्रजातियों के रहने एवं प्रजनन करने के लिए महत्वपूर्ण स्थान है !

भोजन, कच्चे माल, दवाओं एवं जलविद्युत के लिये एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है !

ये परिवहन, पर्यटन और लोगों की सांस्कृतिक संरक्षण में सहायक होता है !

वाणिज्यिक स्तर पर मछली पकड़ने के उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है !

जानवरों, पौधों विभिन्न जीव जंतुओं का निवास स्थान जैव विविधता के लिए परिपूर्ण स्थान होता है !कार्बन डाइऑक्साइड के संग्रहण के लिए अति महत्वपूर्ण स्थान होता है !

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