Wednesday, November 30, 2022
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President of India powers and functions in Hindi | भारत के राष्ट्रपति और उनकी शक्तियाँ क्या हैं? जानें कौन से फैसले ले सकते हैं?

President of India powers and functions. भारत का राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक होता है ! यह राष्ट्र का अध्यक्ष (राष्ट्राध्यक्ष) एवं राष्ट्र की एकता , अखंडता और सुदृढ़ता का परिचायक होता है ! संविधान में संघ की कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति को प्राप्त है परन्तु , वास्तविक शक्तिया प्रधानमंत्री एवं उसके मंत्रिपरिषद में निहित है !

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President of India powers and functions in Hindi | भारत के राष्ट्रपति और उनकी शक्तियाँ क्या हैं? जानें कौन से फैसले ले सकते हैं?

Table of Contents

राष्ट्रपति का पद

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 में राष्ट्रपति केपद का प्रावधान किया गया है  तथा अनुच्छेद 53 के तहत भारत के राष्ट्रपति अपनी कार्यपालिका सम्बन्धी समस्त शक्तियों का प्रयोग स्वयं अथवा अधीनस्थ अधिकारियो के माध्यम से करता है ! “President of India powers and functions in Hindi”

राष्ट्रपति का निर्वाचन

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक राष्ट्रपति का निर्वाचन , एक निर्वाचक मंडल के सदस्यों के द्वरा किया जाता है ! जनता प्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति के निर्वाचन में भागीदार नहीं होता अर्थात जनता द्वरा निर्वाचन सम्बन्धी कार्य अप्रत्यक्ष रूप से उनके द्वरा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से होता है !

राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल

राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों ( लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य , राज्य की विधानसभाओ के निर्वाचित सदस्य एवं केन्द्रशासित प्रदेश दिल्ली व पुदुच्चेरी विधानसभाओ के निर्वाचित सदस्य होते है !

राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति

राष्ट्रपति के निर्वाचन में विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व समान रूप में होना चाहिये तथा संघ एवं राज्यों में समानता भी होनी चाहिये। इसलिये संसद तथा राज्य विधानसभाओं के प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या निम्न प्रकार निर्धारित की जाती है

विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य मतों की संख्या, उस राज्य की को, राज्य की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों तथा 1000 के गुणनफल से प्राप्त संख्या द्वारा भाग देने पर प्राप्त होती है। ध्यातव्य है कि राष्ट्रपति के निर्वाचन में, प्रत्येक एम.एल.ए. के वोट का मूल्य अलग-अलग राज्य में अलग-अलग होता है।

एक विधायक के मत का मूल्य = राज्य की कुल जनसांख्य / राज्य विधानसभा के निर्वाचित कुल सदस्य*1 / 1000

संसद के प्रत्येक सदन के निर्वाचित सदस्यों के मतों की संख्या, सभी राज्यों के विधायकों के मतों के मूल्य को संसद के कुल सदस्यों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है।

एक सांसद के मत का मूल्य = सभी राज्यों के विधायकों के मतों का कुल मूल्य / संसद के निर्वाचित सदस्यों की कुल सदस्य संख्या

चूँकि राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से एकल संक्रमणीय मत तथा गुप्त मतदान द्वारा होता है, इसलिये राष्ट्रपति के चुनाव में निर्वाचित होने के लिये, मतों का एक निश्चित भाग प्राप्त करना होता है, जिसे ‘कोटा’ कहते हैं। “President of India powers and functions in Hindi”

कोटा = (कुल वैधमत / (कुल पद) +1) + 1

राष्ट्रपति चुनाव संबंधी सभी विवाद उच्चतम न्यायालय द्वारा निपटाया जाता है एवं उसका निर्णय अंतिम होता है !

नोट: राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित अन्य तथ्यः

मतदाता, उम्मीदवारों के नाम के आगे अपना वरीयता क्रम 1, 2,3, 4 आदि अंकित करता है।

प्रथम चरण में उम्मीदवारों के मतों की गणना उनको प्राप्त प्रथम वरीयता के मत के आधार पर होती है।

उम्मीदवार को निर्धारित मत न पाने की स्थिति में मतों क स्थानातरण की प्रक्रिया शुरू होती है।

President of India powers and functions in Hindi

द्वितीय चरण में प्रथम वरीयता के न्यूनतम मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द कर इसके द्वितीय वरीयता के मत को अन्य उम्मीदवारों के प्रथम वरीयता के मता में बाँट दिया जाता है।

यह प्रक्रिया जब तक कोई उम्मीदवार निर्धारित मत नहीं प्राप्तकरता तब तक चलती रहती है।

निर्वाचक मंडल के किसी सदस्य का पद रिक्त होने पर राष्ट्रपतिचुनाव को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

यदि उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति की राष्ट्रपति के रूप में नियुक्ति को अवैध घोषित किया जाता है तो उच्चतम न्यायालय कीघोषणा से पूर्व उसके द्वारा किये गए कार्य अवैध नहीं माने जाएंगेतथा प्रभावी बने रहेंगे।

राष्ट्रपति की पदावधि (अनुच्छेद 56)

पद धारण करने की तिथि से पाँच वर्ष तक।

राष्ट्रपति अपनी पदावधि में किसी भी समय अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपतिको दे सकता है।

राष्ट्रपति को उसके कार्यकाल पूरा होने से पूर्व महाभियोग की प्रक्रियाद्वारा ही पद से हटाया जा सकता है।

राष्ट्रपति का पद रिक्त होने की स्थिति में तब तक वह अपनाउत्तरदायित्व निभाएगा, जब तक कि उसका उत्तराधिकारी राष्ट्रपति का पद न ग्रहण कर ले। (पाँच वर्ष के कार्यकाल के उपरांत भी)

पुनर्निर्वाचन के लिये पात्रता ( अनुच्छेद 57)

भारत का राष्ट्रपति एक से अधिक बार भी निर्वाचित हो सकता है, क्योंकि संविधान में ऐसा कोई उपबंध नहीं हैं, जो राष्ट्रपति के पुनः निर्वाचन पर प्रश्नचिह्न लगाए।

नोट: अमेरिका का राष्ट्रपति दो बार से अधिक निर्वाचित नहीं हो सकता है। राष्ट्रपति के चुनाव की अधिसूचना चुनाव आयोग जारी करता है।

राष्ट्रपति के लिये अर्हताएँ, शपथ एवं शर्ते

अर्हताएं (अनुच्छेद 58 )

कोई व्यक्ति राष्ट्रपति तभी निर्वाचित होगा जब वह –

भारत का नागरिक हो।

35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।

लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।

संघ सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण में या किसी सार्वजनिक प्राधिकरण में लाभ के पद पर न हो।(एक वर्तमान राष्ट्रपति अथवा उपराष्ट्रपति, किसी राज्य का राज्यपाल और सघ अथवा राज्य का मंत्री किसी लाभ के पद पर नहीं माना जाता। इस प्रकार वह राष्ट्रपति पद के लिये अर्हक उम्मीदवार होता है।)

नोट: संसद (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1959 कई पदों को लाभ का पद’ के आधार पर निरर्हता से छूट देता है। इस अधिनियम में अब तक पाँच बार संशोधन हो चुका है। संविधान में लाभ का पद’ को परिभाषित नहीं किया गया है लेकिन अनुच्छेद 102 (1) (क) तथा अनुच्छेद 191(1) में इसका उल्लेख मिलता है। लाभ के पद में निम्न पदो को शामिल नहीं किया जाता है।

1. राष्ट्रपति2. किसी राज्य का राज्यपाल3. उपराष्ट्रपति4. संघ या राज्य का मंत्री

राष्ट्रपति के चुनाव के नामांकन के लिये उम्मीदवारों के लिये कम-से-कम 50 प्रस्तावक एवं 50 अनुमोदक होने चाहिये अन्यथा वह अपनी उम्मीदवारों खो देगा।

प्रत्येक उम्मीदवार भारतीय रिजर्व बैंक या सरकारी खजाने में ₹15,000 की जमानत राशि के रूप में जमा करेगा।

यदि उम्मीदवार कुल डाले गए मतों का 1/6 भाग मत प्राप्त नहींकरता तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है।

शर्ते (अनुच्छेद 59 )

वह व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य अथवा राज्य विधानसभा का सदस्य है, राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर उसे सदन की सदस्यता छोड़नी पड़ती है।

वह कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं करेगा।

राष्ट्रपति को आधिकारिक आवास (राष्ट्रपति भवन) आवंटित होगा(बिना किराया चुकाए )

राष्ट्रपति को संसद द्वारा निर्धारित उपलब्धियाँ, भत्ते व विशेषाधिकारप्राप्त होंगे।

उसकी उपलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहींकिये जाएंगे।

शपथ ( अनुच्छेद 60)

 उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रपति को पद कोशपथ दिलाई जाती है। यदि मुख्य न्यायाधीश नहीं है तो ऐसी स्थिति में उच्चतम न्यायालय के ही वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा इस कार्य को संपन्न किया जाता है।

 यदि राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन अन्य कोई व्यक्ति करता है, तो उसे इसी प्रक्रिया से शपथ लेनी होती है।

• राष्ट्रपति शपथ लेता है कि

  1. 1. श्रद्धापूर्वक राष्ट्रपति पद का कार्यपालन करूंगा।

2. संविधान और विधि का संरक्षण प्रतिरक्षण और परिरक्षण करूंगा।

3. भारतीय जनता की सेवा एवं कल्याण में निरत रहूँगा।

भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment of the President of India)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61 में इस बात का प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति द्वारा ‘संविधान का अतिक्रमण करने पर संसद को यह शक्ति है कि वह महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया द्वारा राष्ट्रपति को हटा दे।

 महाभियोग संबंधी आरोप संसद के किसी भी सदन से लगाया जा सकता है, लेकिन शर्त सिर्फ इतनी होती है कि ऐसा करने के लिये 14 दिन पूर्व राष्ट्रपति को नोटिस देना होता है एवं यह नोटिस सदन को कुल सदस्य संख्या के कम से कम एक चौथाई (14) सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिये।

 ऐसी स्थिति में जिस सदन में आरोप लगाया जाता है, उसमें सदन को कुल सदस्य संख्या के दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित कर अगले सदन के लिये भेज दिया जाता है, जिससे इन आरोपों की जाँच हो सके।

 दूसरे सदन में राष्ट्रपति अपना पक्ष रख सकता है।

 यदि दूसरे सदन द्वारा इन आरोपों को सही पाया जाता है तो उस सदन की कुल सदस्य संख्या के दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है। इस प्रकार महाभियोग की प्रक्रिया पूरी होती है एवं राष्ट्रपति को प्रस्ताव पारित होने की तिथि से पद से हट जाना पड़ता है। “President of India powers and functions in Hindi”

नोट: महाभियोग की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति को इसमें उपस्थित होने तथा अपना प्रतिनिधि भेजने का अधिकार होता है।

 महाभियोग एक अर्द्ध न्यायिक प्रक्रिया है।

महाभियोग में शामिल होने वाले सदस्य

संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य के अलावा मनोनीत सदस्य भी इस प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं, भले ही वे राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।

नोट: राष्ट्रपति पर महाभियोग से संबंधित प्रक्रिया में केवल और केवल संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्य ही भाग ले सकते हैं। राज्य विधान सभाओं तथा दिल्ली एवं पुदुच्चेरी के  विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य इसमें भाग नहीं ले सकते, भले ही राष्ट्रपति के निर्वाचन में ये सदस्य भाग लेते हैं।

अभी तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चलाया गया है।

राष्ट्रपति के द्वरा नियुक्त किये जाने वाले लोग

प्रधानमंत्री तथा संघ के अन्य मंत्री

 महान्यायवादी

 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

 उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश

 मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त |

संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्य

राज्य के राज्यपाल और उपराज्यपाल एवप्रशासक

 वित्त आयोग के अध्यक्ष व सदस्य

राष्ट्रपति की शक्तियाँ

कार्यकारी शक्तियाँ (Executive Powers)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 53(1) के तहत संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, जिसे वह स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा प्रयुक्त करेगा।

 संविधान के अनुच्छेद 74(1) में राष्ट्रपति को मंत्रणा या सलाह देने के लिये एक मंत्रिपरिषद् का प्रावधान किया गया है, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा।

भारत सरकार के समस्त शासन संबंधी कार्य राष्ट्रपति के नाम से किये जाते हैं। “President of India powers and functions in Hindi”

भारत का राष्ट्रपति भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति के द्वारा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी की जाती है। मंत्रिगण राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद धारण करेंगे।

  राष्ट्रपति अपनी कार्यकारी शक्तियों के अंतर्गत प्रधानमंत्री से ऐसे निर्णय का प्रतिवेदन भेजने के लिये कह सकता है, जो किसी मंत्री द्वारा लिया गया हो, परंतु मंत्रिपरिषद् ने इसका अनुमोदन नहीं किया हो।

 राष्ट्रपति अंतर्राज्यीय परिषद् का गठन कर सकता है, जिससे केंद्र-राज्य एवं विभिन्न राज्यों के मध्य सहयोग एवं समन्वय स्थापित हो सके।

 राष्ट्रपति अनुसूचित क्षेत्र तथा अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों की प्रशासकीय शक्ति रखता है एवं वह किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित कर सकता है।

वित्त आयोग का गठन (केंद्र व राज्य के मध्य राजस्व बँटवारे हेतु)

 राष्ट्रपति विभिन्न आयोगों की नियुक्ति भी कर सकता है, जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्गों के लिये आयोगों का गठन।

 राष्ट्रपति विधायिका के प्रस्तावों एवं संघ के प्रशासनिक कार्यों से संबंधित जानकारी की मांग प्रधानमंत्री से कर सकता है।

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विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)

राष्ट्रपति संसद की बैठक बुला सकता है एवं सत्रावसान कर सकता है।

लोकसभा का विघटन कर सकता है एवं संसद के संयुक्त अधिवेशन का आह्वान कर सकता है।(संसद के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।)

 प्रत्येक वर्ष संसद के प्रथम अधिवेशन और प्रत्येक नए चुनाव के बाद राष्ट्रपति संसद को संबोधित कर सकता है।

 संसद में लंबित किसी विधेयक के संदर्भ में संसद को संदेश भेजनेकी शक्ति राष्ट्रपति के पास होती है।

 राष्ट्रपति लोकसभा एवं राज्यसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पद रिक्तता की स्थिति में सदन के किसी भी सदस्य को अध्यक्षता सौंप सकता है।

 संसद में कुछ विशेष प्रकार के विधेयकों को प्रस्तुत करने के लिये राष्ट्रपति की पूर्वानुमति आवश्यक होती है। जैसे- किसी राज्य की सीमा में परिवर्तन अथवा नए राज्यों के गठन के लिये विधेयक, ऐसा विधेयक जिसके अधिनियमित किये जाने पर भारत की संचित निधिः से व्यय करना पड़े, ऐसे कराधान से संबंधित विधेयक, जिनसे राज्यों का हित जुड़ा हो या जिनसे राज्यों या जिनसे कृषि आय की परिभाषा में परिवर्तन आता हो को धन वितरित किया जाता हो, राज्यों के विधेयक जो व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हों। “President of India powers and functions in Hindi”

 यदि कोई विधेयक संसद द्वारा पारित होकर राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो वह उसे स्वीकृति दे सकता है या अपनी स्वीकृति सुरक्षित रख सकता है अथवा विधेयक को संसद के पुनर्विचार के लिये लौटा सकता है।

नोट: धन विधेयक को राष्ट्रपति संसद के पुनर्विचार के लिये नहीं। लौटा सकता है।।

जब किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा कोई विधेयक राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजा जाता है तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति विधेयक पर अपनी स्वीकृति दे सकता है या स्वीकृति सुरक्षित रख सकता है अथवा राज्यपाल को निर्देशित करके विधेयक वापस राज्य विधायिका के पास पुनर्विचार के लिये लौटा सकता हनोट: राज्य विधायिका द्वारा पुनर्विचार के पश्चात् भेजे गए विधेयक पर राष्ट्रपति स्वीकृति देने के लिये बाध्य नहीं है।

 राष्ट्रपति अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी कर सकता है। अध्यादेश संसद की पुनः बैठक के छह हफ्तों के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिये। राष्ट्रपति अपने अध्यादेश को किसी भी समय वापस ले सकता है।

राष्ट्रपति के अन्य विधायी कार्य

 नियंत्रक एवं महा लेखापरीक्षक संघ लोक सेवा आयोग, वित्त आयोग व अन्य की रिपोर्ट संसद के समक्ष रखता है।

 अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, दादरा एवं नागर हवेली.. दमन व दीव में शांति, सुशासन व विकास के लिये विनियम बनासकता है।

नोट: राष्ट्रपति पुदुच्चेरी के लिये भी नियम बना सकता है पर शर्त सिर्फ यह है कि वह ऐसा तभी कर सकता है, जब वहाँ की विधानसभा विघटित हो अथवा निलंबित हो।

वित्तीय शक्तियाँ (Financial Powers)

वित्तीय शक्तियों के संदर्भ में राष्ट्रपति को निम्नांकित शक्तियाँ प्राप्त हैं

धन विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्वानुमति से ही संसद में पेश किया जा सकता है।

राष्ट्रपति भारत की आकस्मिक निधि का प्रयोग किसी अप्रत्याशितस्थिति के लिये कर सकता है।

वार्षिक वित्तीय विवरण (केंद्रीय बजट) को संसद के समक्ष रखना।

अनुदान की कोई भी मांग उसकी सिफारिश के बिना नहीं की जासकती है।

न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers)

अपनी न्यायिक शक्तियों के अंतर्गत राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है। साथ ही राज्य के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की भी नियुक्ति करता है।

 राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय से विधिक सलाह भी ले सकता है, परंतु न्यायालय की यह सलाह राष्ट्रपति के लिये बाध्यकारी नहीं होती है।

 अनुच्छेद 72 के तहत किसी अपराध के लिये दोष सिद्ध व्यक्ति को राष्ट्रपति क्षमा अर्थात् दंडादेश का निलंबन, प्राणदंड स्थगन, राहत और माफी प्रदान कर सकता है। ऐसे मामले निम्नलिखित हैं, जिनमें राष्ट्रपति के पास ऐसी शक्ति होती हैं

 यदि दंड अथवा दंड का आदेश किसी ऐसे कानून के उल्लंघन के लिये दिया गया है, जो संघ की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत आता है।

सैन्य न्यायालय से दंडित।

वे सारे दंड जिसका स्वरूप मृत्युदंड हो।

सैन्य शक्तियाँ (Military Powers)

राष्ट्रपति भारत की सेना का सर्वोच्च सेनापति होता है एवं जल, थल और वायु सेना के प्रमुखों की नियुक्ति करता है।

संसद की अनुमति से वह किसी युद्ध की घोषणा या समाप्ति की घोषणा करता है।

आपातकालीन शक्तियाँ (Emergency Powers)

आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिये भारत के राष्ट्रपति को संविधान द्वारा अद्वितीय शक्ति प्रदान की गई है। राष्ट्रपति को ऐसी शक्ति प्रयोग करने का अधिकार तीन परिस्थितियों में प्रदान किया गया है.

  1. राष्ट्रीय आपात (National Emergency) के संदर्भ में (अनुच्छेद 352)
  2. राष्ट्रपति शासन (State Emergency) के संदर्भ में (अनुच्छेद 356 तथा 365)
  3. वित्तीय आपात (Financial Emergency) के संदर्भ में (अनुच्छेद 360)

वीटो शक्तियाँ (Veto Powers)

विधायिकी किसी कार्यवाही को विधि बनने से रोकने की शक्ति वीटो शक्ति कहलाती है.

संविधान राष्ट्रपति को तीन प्रकार के वीटो देता है

पूर्ण वीटो – निर्धारित प्रकिया से पास बिल जब राष्ट्रपति के पास आये ( संविधान संशोधन बिल के अतिरिक्त) तो वह अपनी स्वीकृति या अस्वीकृति की घोषणा कर सकते हैं. किंतु यदि अनुच्छेद 368 ( सविधान संशोधन ) के अंतर्गत कोई बिल आये तो वह अपनी अस्वीकृति नहीं दे सकते हैं.

निलम्बनकारी वीटो- संविधान संशोधन अथवा धन बिल के अतिरिक्त राष्ट्रपति को भेजा गया कोई भी बिल वह संसद को पुर्नविचार हेतु वापस भेज सकते हैं. किंतु संसद यदि इस बिल को पुनः पास कर के भेज दे तो उसके पास सिवाय इसके कोई विकल्प नहीं है कि उस बिल को स्वीकृति दे दें.

पॉकेट वीटो – संविधान राष्ट्रपति को स्वीकृति या अस्वीकृति देने के लिये कोई समय सीमा नहीं देता है. यदि राष्ट्रपति किसी बिल पर कोई निर्णय ना दें (सामान्य बिल, न कि धन या संविधान संशोधन ) तो माना जायेगा कि उन्होंने अपने पॉकेट वीटो का प्रयोग किया है.

राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियां

-प्रधान मंत्री राष्ट्रपति को समय-समय पर मिल कर राज्य के मामलों तथा भावी विधेयकों के बारे में सूचना देंगे. राष्ट्रपति सूचना प्राप्ति का अधिकार रखते हैं.प्रधानमंत्री पर एक संवैधानिक उत्तरदायित्व होता है यह अधिकार राष्ट्रपति कभी भी प्रयोग ला सकते हैं. इसके माध्यम से वह मंत्री परिषद को विधेयकों निर्णयों के परिणामों की चेतावनी दे सकते हैं.

जब कोई राजनैतिक दल लोकसभा बहुमत नहीं पा सके तब वह अपने विवेकानुसार प्रधानमंत्री की  नियुक्ति कर सकते हैं.

 – संसद के सदनों को बैठक हेतु बुला सकते हैं.

 -लोकसभा का विघटन कर सकते हैं, यदि मंत्रीपरिषद को बहुमत प्राप्त नहीं है.

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